Trilokinath Temple History in Hindi – त्रिलोकीनाथ मंदिर

इस खुबसुरत त्रिलोकीनाथ मंदिर में आपको भगवन शिव और महात्मा बुद्ध दोनों के दर्शन हो जायेंगे | जानिए इस रोचक त्रिलोकीनाथ cave temple से जुडी history, distance, best time to visit, katha और कहानी से जुडी जानकारी | यह मंदिर आपके  त्रिलोकीनाथ गाँव में स्थित है जो चेनाब नदी के बाई और दक्षिण दिशा में 6 km की दुरी पर स्थित है | यह गाँव भारत में स्थित हिमाचल प्रदेश के लाहुल और स्पिति जिला में बसे लाहुल तालुका में स्थित है | यह गाँव उदयपुर से लगभग 9 km की दुरी पर स्थित है | यह मंदिर दो धर्मो का पवित्र स्थल है, इस मंदिर पर दोनों धर्म को लोगो का सामान्य अधिकार है | मान्यताओ के आधार पर इस मंदिर में हिन्दू एवं बौद्ध धर्म वाले पूजा करते है | इस स्थान का पौराणिक नाम टुंडा विहार था जो आज त्रिलोकीनाथ के नाम से जाना जाता है |

Trilokinath Temple



About Trilokinath Temple / इस मंदिर से जुडी जानकारी

त्रिलोकीनाथ भारत का का एक ऐसा मंदिर है जहाँ लोगो की एकता का पता चलता है | इस मंदिर में दो धर्म देव की पूजा एक ही छत के नीचे की जाती है | यहाँ हिन्दू एवं बौद्ध धर्म के लोग अपने अपने भगवान की पूजा पद्धति एवं धार्मिक अनुष्ठान एक साथ करते हुए नजर आते है | इस मंदिर की एक खास बात यह है की इस मंदिर में एक प्रतिमा स्थापित की गई है जिसकी पूजा हिन्दू धर्म के लोग भगवान त्रिलोकीनाथ अर्थात शिव एवं बौद्ध धर्म के लोग इस इस मूर्ति को भगवान अवलोकतेश्वर के रूप में पूजते है | इसी तरह हमारे देश में और कई अन्य भी मंदिर हैं जैसे Kandariya Mahadeva TempleChintpurni Temple और Raghunath Temple है जहाँ हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए जाते हैं |

इस मंदिर के मुख्य द्वारा पर दो स्तम्भ का निर्माण किया गया है जिसे पाप पुण्य का तराजू कहा जाता है इस तराजू से पार होने वाले व्यक्ति अगर मोटा है और पाप नहीं किए होता है तो वह बड़े आसानी से निकल जाता है बल्कि अगर कोई पापी व्यक्ति है और उसका शरीर पतला है तो भी वह इस खम्भे में फस सकता है |



History of Trilokinath Temple / कथा और इतिहास

2002 में मिले शिलालेख से हमे इस बात का पता चलता है की इस मंदिर का निर्माण 10 वी शताब्दी में किया गया था | इस शिलालेख में इस बात का भी जिक्र किया गया है की इस मंदिर का निर्माण कार्य दीवानजरा राणा के द्वारा किया गया जो त्रिलोकनाथ के वर्तमान शासक राणा ठाकर्स के पूर्वज थे | इस मंदिर के बारे में अनुमान लगाया जाता है की इस मंदिर का निर्माण कार्य 9 वीं सदी में पूरी हो गई थी पर इस मंदिर को दर्शन एवं पूजा के लिए 10 वीं सदी में खोला गया | मंदिर निर्माण के समय यहाँ अवलोकीतेश्वर के के छः सर वाला मूर्ति स्थापित की गई थी जो भूरे पत्थर का बना हुआ था वह चोरी हो गई थी उसके बाद इस स्थान पर संगमरमर के मूर्ति स्थापित किया गया |

Place to Visit near Trilokinath Temple

अगर आप त्रिलोकीनाथ मंदिर दर्शन के लिए आए है और आपको नए जगह पर घुमने का शौख रहता है तो आप निम्न स्थानों पर जा सकते है | मध्य प्रदेश में ऐसे कई स्थान है जो लोगो को अपनी और काफी आकर्षित करता है |

Kardang Monastery – मंदिर से 33 km की दुरी पर स्थित Kardang Monastery लोगो को काफी आकर्षित करता है | मंदिर के साथ साथ आप इस स्थान का भी लुफ्त उठा सकते है |

Shashur Monastery – अगर आप मंदिर भ्रमण के लिए आए है तो आप मंदिर से 34 km दूर स्थित Shashur Monastery ला लुफ्त उठा सकते है |

Tayul Monastery – Tayul Monastery हिमाचल प्रदेश में स्थित एक बेहद खुबसूरत स्थान है जहा लोग अकसर अपने मनोरंजन के लिए आते रहते है | यह स्थान मंदिर से 37 km की दुरी पर स्थित है |

Best Time to Visit

त्रिलोकीनाथ मंदिर के खूबसूरती का लुफ्त उठाने का सही समय जुलाई से सितम्बर के मध्य का समय है | अन्य समय में यहाँ का मौसम पर्यटकों के अनुकूल नहीं होता | इस स्थान पर हिमवर्षा अधिक होती है | अगर आप बर्फ़बारी का लुफ्त उठाना चाहते है तो आप अन्य समय में आ सकते है जो आपकी लिए हानिकारक भी हो सकता है |

How to Visit

अगर आप इस स्थान का लुफ्त उठाना चाहते है तो आप हवाई रेल एवं सड़क मार्ग का इस्तेमाल कर सकते है | अगर आप इस मंदिर दर्शन के लिए यात्रा कर रहे है तो आपको इस मंदिर तक पहुचने के लिए हिमाचल प्रदेश स्थित हवाई पतन या ट्रेन परिवाह या सड़क परिवहन का भी इस्तेमाल कर सकते है | इस मंदिर तक पहुचने के लिए आप निजी वहाँ या cab कर सकते है |

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