Kandariya Mahadeva Temple, Khajuraho History in Hindi

जानिए पवित्र Kandariya Mahadeva Temple के बारे में जो Khajuraho में है, जानिए इसकी history, facts, इसे किसने बनवाया था, entry timing, से जुडी information.  यह मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के खजुराहो में पाए जाने वाले मध्ययुगीय मंदिर के समूह में से सबसे बड़ा और सबसे अलंकृत हिंदू मंदिर है । इस मंदिर का अर्थं है “गुफा के महान भगवान”  | यह मंदिर भारत में पाए जाने वाले सभी मध्ययुगीय मंदिरों में से एक है | यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित किया गया है | इस भव्य मंदिर को 900 से अधिक पत्थरों से बनाया गया है, और इन पत्थरों पर उत्कीर्ण नकाशी की गई है |Kandariya Mahadeva Temple detail in Hindi



History

खजुराहो एक समय Chandel dynasty की राजधानी थी । कन्दारिया महादेव मंदिर, भारत में medieval time के संरक्षित मंदिरों का सबसे अच्छा उदाहरण है,  यह खजुराहो परिसर के मंदिरों के पश्चिमी समूह का सबसे बड़ा समूह है, जिसे चंदेल शासकों द्वारा 950 CE और 1050 CE  में बनाया गया था । माना जाता है कि हर Chandel शासक ने अपने जीवनकाल में कम से कम एक मंदिर का निर्माण किया था | इसलिए सभी खजुराहो मंदिर किसी भी एक चंदेल शासक के द्वारा निर्मित नहीं हैं, लेकिन मंदिर भवन चंदेल शासकों की एक परंपरा रही है | चंदेल शासकों ने धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से राजनीति भेदभाव करने की कोशिश की थी,  इसलिए उन्होंने महोबा में उनकी राजनीतिक राजधानी की स्थापना की जो कि खजुराहो से लगभग 60 कि.मी. दूर था | पूरे Khajuraho को एक दिवार द्वारा संगलन करने के लिए लगभग 8 दवार के साथ संगलन किया गया था | यह माना जाता है कि प्रत्येक gate दो खजूर के पेड़ से घिरी हुई था और यही कारण इसका नाम Khajuraho पड़ा |

चंदेल वंश (1150 ई। के बाद) के बाद, खजुराहो मंदिरों ने इस इलाके में मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा विनाश और विरूपण का सामना किया, जिसके कारण वहां के स्थानीय लोग खजुराहो छोड़ने के लिए मजबूर हो गए । चूंकि मुसलमान आक्रमणकारियों के पास अन्य धर्मों की पूजा स्थलों के लिए असहिष्णुता की एक सत्तारूढ़ नीति थी, इसलिए खजुराहो के सभी नागरिकों ने मुस्लिम शाशकों से आशा व्यक्त की, कि वे उस एकांत मंदिर के क्षेत्र में मुस्लिम आक्रमणकारियों का ध्यान आकर्षित नहीं होने दे और उन मंदिरों को नष्ट न करे | इसलिए 13वीं सदी से लेकर 18वीं शताब्दी तक, खजुराहो मंदिर जंगलों में छिपा रहा, और ब्रिटिश इंजीनियर T. S. Burt ने इसे फिर से खोजा निकाला था ।



विशेषताएं / Features

कन्दारिया महादेव मंदिर 31 meter (102 ft) उच्चा है जो की खजुराहो परिसर के तीनो समूह में सबसे विशाल है और यह पश्चिमी परिसर में मौजूद है | पश्चिमी परिस में मंदिर Kandariya, Matangeshwara और Vishvanatha मंदिर समिलित है | इन सभी मंदिरों में एक “cosmic design of a hexagon” है जो की भगवान शिव के तीनो रूपों को दर्शाता है | मंदिर की architecture में खंबे और tower का एक संयोजन है जो की शिखर तक समाप्त होता है, 10वीं शताब्दी के बाद ये विशेषता मध्य भारत के मंदिरों में से आम हो गई थी | कन्दारिया महादेव मंदिर को 13 ft ऊँचे चबुतरे के ऊपर बनाया गया है, और इस मंदिर को निपूर्ण योजना और मनभावन रूप से बनाया गया है | इस मंदिर को खड़ी पहाड़ी के सामान बनाया गया है |  कन्दारिया महादेव मंदिर को खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिर कहा जाता है |

Nearby places to visit :

कन्दारिया महादेव मंदिर के आस पास ऐसे कई स्थान है जो की देखने योग है | इस मंदिर के अलावा यहाँ और भी कई सारी मंदिरे है जैसे की Ganesha temple, Matangeshwar temple, Javeri temple, Vishvanath temple, Lakshmana Vaikuntha temaple , Brahma temple, Rishabha Lalgun Mahadev temple, Varaha temple, Hanuman temple, Vamana temple, Chitragupta temple, Chaturbhuja temple, Parshvanath temple |

Best time to visit :

खजुराहो मध्य भारत का एक छोटा सा गांव है। गांव से vindhyan range के outcrops को देखा जा सकता है | खजुराहो आने का सबसे अच्छा समय October से March के बीच होता है क्योकि उस वक्त यहाँ के मौसम का औसत तापमान 90 और 40 डिग्री Fahrenheit के बीच का होता है जो की बहुत ही अनुकूल और सुहाना होता है |

Opening & Closing Time of Kandariya Temple

यह मंदिर पुरे वर्ष और हर दिन खुला रहता है, लेकिन इस मंदिर के खुलने के लिए एक समय निर्धारित किए गए हैं, जो की इस प्रकार है |

  • सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक |
  • शाम को 4:00 बजे से रात के 9:00 बजे तक |

Entry fee :

इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए भारतीयों के लिए 10 रुपया का ticket लेना होता है, और विदेशी शैलानियों के लिए 250 रुपया का ticket लेने होता है | इस मंदिर परिसर में किसी तरह का camera लेने की अनुमति नहीं है |

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