Kanak Bhavan Temple, Ayodhya in Hindi – कनक भवन मंदिर

यह खुबसूरत Kanak Bhavan Temple आपके Ayodhya में है, इसे सोने की मंदिर भी बोली जाती है | Kanak का मतलब Hindi में सोना होता है | यहाँ पर भगवान श्री राम और माता सीता जी की मूर्ति है | जानिए इस मंदिर से जुडी अन्य जानकारी | भारत में स्थित हिन्दू धर्म के धार्मिक स्थलों में एक कनक भवन मंदिर भी शामिल है | यह भवन वास्तुशिल्प का अदभुत नमूना है, इस भवन में भगवान श्री राम एवं इनकी धर्मपत्नी देवी सीता को स्थापित किया गया है | यह भवन भारत के उत्तरप्रदेश के पावन नगरी अयोध्या में स्थित है | इस शहर में कई मंदिर स्थित है परन्तु यहाँ स्थित सभी मंदिरों में यह सबसे अदभुत एवं आकर्षक है | यह मंदिर दिखने में जितना आकर्षक बाहर से है इसके अन्दर की शिल्पसौन्दर्य उतने ही अदभुत एवं आकर्षक है |

Kanak bhavan temple



इस मंदिर के भवन के साथ यहाँ पर स्थापित प्रतिमा भी शिल्पसौन्दर्य का अनोखा उदाहरण है | यहाँ की प्रतिमाओ को देख लोग इस मंदिर की और खिचे चले आते है | इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की इसके ईमारत एवं यहाँ प्रतिष्ठित प्रतिमा में एक अजीब सी आकर्षण है जो लोगो को अपनी और खीचे रहता है | सुबह के सूर्य की किरणे इस भवन पर पड़ने पर यह और भी आकर्षक हो जाता है जिसे हर कोई अपने camera में कैद कर रखना पसंद करता है |

कनक भवन मंदिर का इतिहास / History of Kanak Bhavan Temple

सोने का भवन कहा जाने वाला कनक भवन मंदिर का जिक्र प्राचीन भारत के इतिहास में यह लिखा है की इस मंदिर का निर्माण त्रेतायुग में महाराज दशरथ की रानी कैकेयी के द्वारा कराया गया था | इस भवन का निर्माण के लिए महारानी ने महाराज दशरथ से अनुरोध किए जिसके बाद इस भवन का निर्माण शिल्प देव विश्वकर्मा के सर्वश्रेष्ठ शिल्पकारो के द्वारा किया गया था | इस महल को कैकेयी ने अपने बहु सीता को मुह दिखाई में उपहार के रूप में दिए थे | श्री राम जब श्रीधाम की यात्रा पर निकले उस समय इनके पुत्र कुश के द्वारा इस भवन में अपने माता पिता अर्थात भगवान राम एवं देवी सीता के प्रतिमा को स्थापित किया गया था | समय बिताता गया और समय के साथ मंदिर भवन भी पुराना होता गया |



Lord Shree Ram at Kanak bhavan-temple

कैकेयी द्वारा निर्माण कराया गया भवन त्रेतायुग का था जो बहुत पहले नष्ट हो गया था | ओरछा देश के महाराज महेन्द्र प्रताप सिंह के शासन काल में इनके पत्नी महारानी वृषभानु कुंवरि के देख रेख में इस मंदिर का पुनः निर्माण किया गया और सन 1891 ई. में इस मंदिर में भगवान की प्राचीन मूर्तियों को पुनः स्थापित किया गया था |

इस मंदिर के बारे में यह कहा जाता है की यहाँ आज भी भगवान की उपस्थिति है | लोग इस मंदिर में आकर भगवान को अपने समीप होने का अनुभव करते है |

जाने का अच्छा वक्त / Best Time to Visit Kanak Bhavan Temple

मंदिर परिसर भक्तो के लिए वर्ष के सभी महीनो में खुला रहता है | इस मंदिर के अदभुत एवं भव्य शिल्पकला का लुफ्त आप उठा सकते है | किसी भी मौसम में यह बंद नहीं होता एवं भक्त इस मंदिर का लुफ्त पुरे वर्ष उठा सकते है |

कैसे जाइये / How to Visit

By Air – इस मंदिर तक पहुचने के लिए हवाई मार्ग की भी व्यवस्था है | अगर आप इस मार्ग का लुफ्त उठाना चाहते है तो आपको इस मंदिर के नजदीकी हवाईपतन का इस्तेमाल कर सकते है | इस मंदिर के नजदीक में फैजाबाद एवं लखनऊ हवाईअड्डा जो अयोध्या से 8 km एवं 130 km की दुरी पर स्थित है |

By Train – इस शहर तक आने के लिए यहाँ रोजाना रेल का आवागमन होता है जो आपको अयोध्या तक पंहुचा सकते है | यहाँ स्थित रेलवे स्टेशन से आप निजी वाहनों का इस्तेमाल कर मंदिर तक पहुच सकते है |

By Bus – मंदिर आस्था नगरी में स्थित है जिस कारण यहाँ आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती | अयोध्या आने के बाद आप यहाँ से साइकिल या रिक्शेवाले के मदद से मंदिर तक पहुच सकते है |

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