The Chintpurni Temple in Hindi – चिंतपूर्णी मंदिर

पवित्र Chintpurni Devi Temple एक शक्ति पीठ है, और यह धाम Himachal Pradesh में located है | इस मंदिर की history, best time to visit और story information Hindi भाषा में | भारत में पश्चिमी हिमालय के पहाड़ी क्षेत्र से घिरा चिंतपूर्णी मंदिर है जो सभी धर्म के धार्मिक पीठ के रूप में जाना जाता है | यह मंदिर हिन्दू का शक्ति पीठ के साथ साथ प्रमुख तीर्थस्थल भी है | चिंतपूर्णी शक्ति पीठ भारत के हिमाचल प्रदेश में स्थित उना नामक जिले में स्थित है | इस मंदिर में माता छिन्नमस्तिका विद्धमान है | भारत में माता छिन्नमस्तिका के कुल 7 प्रमुख मंदिर एवं 51 शक्ति पीठ स्थित है |

Chintpurni Temple detail in Hindi



इस चिंतपूर्णी मंदिर में वर्षो से माता की पूजा अर्चना होती आ रहे है एवं पुरे भारत से एवं अन्य स्थान से भी इस स्थान पर लोग अपनी अपनी समस्या ले कर आते है एवं माता से समस्या का निवारण के लिए प्राथना करते है | इस मंदिर की खास बात यह है की यहाँ पर सच्चे दिल से माता से किया प्रार्थना जल्द स्वीकार होता है एवं मनोकामना पूर्ण होती है |

History of Chintpurni Mandir

पंडित माई दास जो एक सरस्ववत ब्राह्मण है इनका यह मनाना है की इनके पहले 26 वीं पीडी के द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया था | आरंभिक दौर पर इस शक्तिपीठ को कई भगवानो के मंदिर के रूप में जाना जाता था पर बदलते समय के साथ आज इस मंदिर को चिंतपूर्णी शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है | इस मंदिर को शुरू से आज तक सरस्ववत ब्राह्मण के द्वारा पूजा अर्चना किया जाता है | इस वंश के सभी प्राणी अपना जीवन व्यापन मंदिर में पूजा करके करते है | इस वंश के लोग इस मंदिर का अधिकारिक पंडित होते है | पढ़िए रघुनाथ मंदिर और देवी तालाब मंदिर से जुडी जानकारी जो काफी महसूर मंदिरों में गिनी जाती है |

हिन्दू ग्रंथो एवं पुरानो में इस मंदिर के निर्माण के बारे में जिक्र किया गया है | माता सती के प्राण त्यागने से भगवान शिव काफी गुस्सा हो गए एवं माता सती के शव को ले कर तांडव करने लगे | भगवान शिव के इस तांडव से पुरे ब्रह्माण्ड में खलबली मच गई | भगवान शिव के इस तांडव को रोकने के लिए सभी देवो के बीच मंत्रणा हुई और इस मंत्रणा में भगवान विष्णु ने यह युक्ति निकले की किसी भी प्रकार से सती के शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाए इससे शिव का क्रोध शांत होगा | पर सभी के पास यह समस्या थी की शव का अंतिम संस्कार कैसे करे ? क्योकि शव शिव के पास था | तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन के मदद से सती के शव के 51 टुकडे कर दिए | ये सभी टुकडे धरती पर आ गिरे जो भारत के विभिन्न 51 स्थानों पर गिरा | जिस स्थान पर भी सती के शव का टुकड़ा गिरा आज वहाँ शक्ति पीठ की स्थापना की गई | इस स्थान पर इनका पैर गिरा जिस कारण अन्य सभी शक्ति पीठ में सबसे महत्वपूर्ण शक्ति पीठ चिंतपूर्णी शक्तिपीठ है |



छिन्मस्तिका देवी आत्म-बलिदान का दैवीय रूप है | मार्कंडेय पुराण में माता की एक अदभुत आत्म-बलिदान की कहानी कही गई है की, एक समय माता छिन्मस्तिका एवं असुरो के बीच भीषण यूद्ध चल रहा था | लम्बे समय के बाद जब यूद्ध ख़त्म हुआ तो इनके दो सहयोगी जया एवं विजया दोनों की रक्त प्यास नहीं बुझी थी और वे रक्त तलाश रही थी | तब माता ने अपने स्वाम के सर को काट कर इनकी प्यास बुझाई थी |

Best Time to Visit

चिंतपूर्णी मंदिर वर्ष में सभी महिना भक्तो के लिए खुला होता है | अगर आप इस मंदिर में माता का दर्शन करना चाहते है तो आप किसी भी मौसम में आ सकते है | परन्तु शीत ऋतू में इस मंदिर के आस पास का नियुनतम तापमान शुन्य से भी नीचे चला जाता जो पर्यटकों के स्वास्थ के लिए सही नहीं है एवं वर्षा ऋतू में यहाँ अन्य स्थानों के अपेक्षा अधिक वर्षा होती है इसलिए पर्यटकों के लिए अति उत्तम समय अप्रैल से सितम्बर के मध्य का माना जाता है |

How to Visit

By Air – मंदिर का दर्शन करने के लिए कई श्रद्धालु हवाई मार्ग का इस्तेमाल करते है | अगर आप हवाई मार्ग का इस्तेमाल कर मंदिर का दर्शन करना कहते है तो आप इस मंदिर के नजदीकी हवाईपतन का इस्तेमाल कर सकते है जहा से आप निजी वहाँ की मदद से मंदिर तक आ सकते है | इस मंदिर से नजदीक का airport निम्नलिखित है :-

  • गग्गल हवाईअड्डा धर्मशाला, काँगड़ा – 60 km
  • अमृतसर हवाईअड्डा – 160 km
  • चंडीगढ़ हवाईअड्डा – 150 km

By Train – चिंतपूर्णी तक आने के लिए पुरे भारत के विभिन्न शहरों से कई सारे रेलगाड़ी है जो आपको मंदिर के नजदीकी रेलवे स्टेशन तक पंहुचा सकते है, जहाँ से आप निजी वहाँ के मदद से मंदिर तक पहुच सकते है | मंदिर से नजदीक का stetion निम्नलिखित है :-

  • Amb Andaura – 20 km
  • Hoshiarpur – 42 km
  • Una Himachal – 50 km

By Road – सरकार द्वारा चिंतपूर्णी को सभी मुख्य शहर से जोड़ा गया है | यहाँ तक आने के लिए आपको सभी प्रकार का tourist vehicle मिल सकते है या आप अन्य बस या taxi का इस्तेमाल कर मंदिर तक पहुच सकते है | चिंतपूर्णी से निम्न शहरों की दुरी (distance) निम्नलिखित है :-

  • Chandigarh to Chintpurni – 150 km
  • Delhi to Chintpurni – 420 km
  • Hoshiarpur to Chintpurni – 42 km
  • Jalandhar to Chintpurni – 90 km
  • Kangra to Chintpurni – 55 km
  • Naina Devi to Chintpurni – 115 km
  • Vaishno Devi to Chintpurni – 250 km

Places to visit near Chintpurni Temple

हिमाचल प्रदेश में कई ऐसे स्थान है जो दर्शनीय योग्य है | Himachal Pradesh में माता चिंतपूर्णी का मंदिर, एक oprime पर्यटक आकर्षण है, इसके अलावा यहाँ और भी कई ऐसे स्थान है जो दर्शनीय है |

Kangra : Kangra हिमालय के सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक के रूप में जाना जाता है | यह घाटी हरियाली से भरी हुई है, जो की देखने योग्य है | यह क्षेत्र कला और शिल्प के लिए प्रसिद्ध है | Chintpurni से Kangra 34 km दूर है |

Dharamsala : Dharamsala सुरम्य कांगड़ा घाटी में स्थित और हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पर्वत श्रृंखला से सटा हुआ एक स्थान है | धर्मशाला, प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है | धर्मशाला को हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन राजधानी के रूप से भी जाना जाता है | यह Chintpurni से 48 km दूर है |

Mandi : 81 से अधिक मंदिरों के साथ, मंडी पूर्व के वाराणसी के रूप में जाना जाता है और यह ब्यास नदी के तट पर स्थित है। मंडी का नाम ऋषि मांदव से प्राप्त करता है, जिन्होंने यहां ध्यान लगाये थे | शिमला के बाद मंडी हिमाचल प्रदेश का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है | यह चिंतपूर्णी मंदिर से 76 km की दुरी पर स्थित है |

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