Bhangarh Fort History in Hindi – भानगढ़ किले का इतिहास

Bhangarh Fort History and Story in Hindi – हमारे देश में ऐसे कई किले है जिनके बारे में काफी कहानी प्रचलित है और उसी में से एक भानगढ़ का किला भी है जिसे हॉन्टेड प्लेस यानि भुतहा किला के नाम से जाना जाता है | आइये जानते हैं इसके विकिपीडिया, इसे किसने और कब बनवाया से जुडी जानकारी के बारे में | भारत के राजस्थान राज्य में कई राजाओ महाराजो का राज रहा, जिस कारण यहाँ कई सारे दुर्ग एवं महल देखने को मिलता है | यहाँ निर्मित सभी किला स्वयं में एक मिसाल बना हुआ है और अपने पीछे कई कहानियो को भी कहता है | इन सभी किला में एक किला भानगढ़ का किला है जो राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है | यह स्थान एक पर्यटक स्थान है जो आज कल भुतिया महल के नाम से भी जाना जाता है | आइए जानते है कुछ रोचक बाते इस महल के बारे में |

Bhangarh Fort



भानगढ़ किले के बारे में (About)

राजस्थान के अलवर जिले के aravali range के sariska reserve के सीमा पर स्थित है | इस किले का निर्माण मान सिंह के द्वारा किया गया था | इस महल से थोड़ी दुरी पर गोलकाबास नाम का गाँव स्थित है | यह महल पहैसी के धलम पर स्थित है जिसके चारो और हरे भरे पेड़ पौधे लगे थे | यह महल तीन और से पहाडियों से घिरा हुआ है | इस महल को काफी व्यवस्थित तरीके से बनाया गया था इसके प्रवेश द्वारा पर हनुमान जी को स्थापित किया गया था इसके पश्चात यहाँ पर बाजार था और बाजार के बाद राजमहल परिसर के विभाजन के लिए त्रिपोलिया द्वार बनाया गया था । इस द्वारा के बाद राज महल स्थित था | इस महल में कई मंदिर का निर्माण भी किया गया था जिसमे भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर प्रमुख थे ।

भानगढ़ का इतिहास (History)

भगवंत दास के द्वारा 1573 में निर्मित भानगढ़ किले के बारे में कहा जाता है की भारत में पाए जाने वाले सभी हॉन्टेड प्लेस की सूचि में यह सबसे ऊपर है | इस किले में पुरातत्व वैज्ञानिको के द्वारा एक तख्ती लगाई गई है जो आम लोगो को सावधान करती है की वे इस महल में आस पास सूर्योदय एवं सूर्यास्त के बाद नहीं रहे | पुरातत्व वैज्ञानिको भी इस बात को मानते है की इस महल में कुछ आत्माओ का वास है जो daily रात को सक्रीय रहते है | इस महल के इस स्थित के बारे में यह कहा गया है की इस महल को तांत्रिक एवं बाबा बालकनाथ का श्राप मिला हुआ था जिस कारण आज भी यहाँ आत्मा भटकते हुए नजर आती है |



भानगढ़ दुर्ग के श्राप की कहानी

बाबा बालकनाथ का श्राप – किले का निर्माण के समय भगवंत दास ने राजा को यह बताया था की महल को बनाओ पर उसकी उच्चाई इतनी मत रखना की उसकी छाया मेरे कुटिया या मेरे पूजा स्थल तह पहुचे अगर ऐसा हुआ तो तुम्हारा साम्राज्य नष्ट हो जाएगा | इस बात को राजा के द्वारा माना गया परन्तु इनके मृत्यु के उपरांत यहाँ कई राजा बैठे जिसमे माधो सिंह ने इस किला का पुनः निर्माण किया और इसके उच्चाई को बाधा दिया | जिसके कुछ समय के बाद यहाँ की विधि व्यवस्था ख़राब होने लगी और लोगो का विनाश आरम्भ हो गया |

तांत्रिक का श्राप – कहा जाता है की इस राज में एक तांत्रिक रहता था उस समय इस राज्य की राजकुमारी रत्नावती बेहद खुबसूरत थी | एक बार तांत्रिक की नजर राजकुमारी पर पड़ी उसकी खूबसूरती को देख कर तांत्रिक उसपर मोहित हो गया और उसे अपना बनाने का सोच लिया | एक समय राजकुमारी की दासियाँ बाजार गई उस समय तांत्रिक ने देखा की तांत्रिक राजकुमरी के लिए इत्र ले रही थी तब तांत्रिक ने इत्र में कला जादू कर उन्हें दिया | तांत्रिक के इस हरकत को महल का एक विश्वासी देख लिया और राजकुमारी को बता दिया | इस बात को सुनकर राजकुमारी काफी गुस्सा हुई और इत्र को पत्थर पर फिक दिया जिससे बोतल टूट गई और पत्थर पर फ़ैल गई | इत्र पत्थर पर गिरते ही पत्थर खिसके लगा और तांत्रिक के पिच्छे चल पड़ा और तांत्रिक को कुचल दिया | मरते समय तांत्रिक ने यह शतप दिया की इस महल में निवास करने वाले सभी लोगो की मृत्यु जल्द हो जाएगी और मरे हुए व्यक्ति की आत्मा इस महल में हमेशा भटकते रहेगी | तांत्रिक के मौत के कुछ समय बाद भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ जिसमे भानगढ़ के सभी व्यक्ति की मृत्यु हो गई और महल वीरान हो गया और यह आज तक वीरान पड़ा हुआ है |

यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय  (Best Time to Visit)

अगर आप इस किले का लुफ्त उठाना चाहते है तो आप अक्टूबर से मार्च के बीच आ सकते है | यह समय इस पर्यटन केंद्र का लुफ्त उठाने का अति उत्तम समय है | इसके अलावा अन्य समय में वर्षा और गर्मी का असर होता है जो पर्यटकों के अनुकूल नहीं होता |

यहाँ कैसे पहुचे (How to Reach)

By Air – भानगढ़ के नजदीक का हवाईपतन Santander airport, Jaipur है जो 56 km की दुरी पर स्थित है यहाँ से आपको सड़क परिवहन का इस्तेमाल कर किले तक पहुचना पड़ेगा |

By Train – इस किले से 22 km की दुरी पर Dausa railway station स्थित है जो आपको इस किले तक पहुचे में सुविधा प्रदान करेगी |

By Road – यह किला जयपुर-दिल्ली मार्ग पर स्थित है जहा हर समय बस सेवा उपलब्ध है | इस किला से जयपुर 85 km एवं दिल्ली 255 km की दुरी पर स्थित है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *